आप शुतुरमुर्ग हैं

ग्रेटा थनबर्ग के नाम से शायद आप इत्तेफ़ाक़ रखते होंगे. सोलह साल की छोटी आयु में इस बच्ची ने UN की महासभा को सम्बोधित किया था. पर्यावरण बचाने के लिए दुनिया भर के नेताओं से अनुरोध ही नहीं बल्कि पूरे हक़ से मांग भी करी थी. वह एक साहसी लड़की है और हम सब उसके शुक्रगुज़ार भी हैं. उसके भाषण का एक तकियाकलाम काफी मशहूर हुआ था जिसको लिख कर सबने ग्रेटा के विचारों पर अपनी सहमती व्यक्त करने के साथ साथ पर्यावरण के प्रति हमारे कर्त्तव्य और तमाम देशों के नेताओं से गुहार भी करी थी. इन सभी लोगों में भारत के कई जाने माने अभिनेता और अभिनेत्रियां भी शामिल थीं. उन्होंने बढ़ चढ़कर इस विचार को अपने प्रशंसकों के साथ अभिव्यक्त किया.

ग्रेटा की बात से सहमति रखना इसलिए आसान था क्यूंकि पर्यावरण की सुरक्षा करने जैसे नारे से कोई भी असहमत नहीं होगा. फिर चाहे वो खुद कुछ करे ना करे, पर सहमति रखने में किसका क्या जाता है. फिर ग्रेटा एक विदेशी भी है. विदेशियों की बात से तो हम काफी जल्दी सहमत होते हैं. आखिर ख्याल तो आज भी वही है ” तुम्हारा खून खून, हमारा खून पानी है! यहां बचपन भी बुढ़ापा, वहां बुढ़ापा भी जवानी है! “.

पर बीते दिनों से हमारे अपने देश के हालात कुछ तंग लग रहे हैं. अतिथि देवो भव वाले देश में अपने ही देश के छात्रों को राक्षस की तरह देखा जा रहा है. प्रदूषण ने हालत तो सबके बराबर ही बिगाड़े थे पर कुछ को अब आंसू गैस की मार भी झेलनी पड़ रही है. पर अब अचानक हमारे चहीते कलाकारों ने मौन धारण किया है. आप सोच रहे होंगे क्यों. क्यूंकि ये आने वाले समय के लिए बहुत उम्दा पिक्चर बनाने की कहानी होगी. ये कलाकार अपने देश में हो रहे कोलाहल पर शुतुरमुर्ग की तरह अपना सिर रेत में घुसा कर ध्यानमग्न हो जाते हैं. अभी ये इंतज़ार करते हैं की कब ये भंवर जाएगा और कब हम इस पर चार गाने बनाकर ठुमके लगाएंगे और अपनी देश के प्रति वफादारी अभिव्यक्त करेंगे.

बाकायदा इनको जिनको हमने अपनी आँख का तारा बना रखा है, जिन्हें इस देश के सर्वोच्च सम्मानों से सुशोभित किया जाता है, और फिर नेता बनने के लिए चुनाव में तक उमीदवार बनाया जाता है वो बस अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहते हैं. याद है आपको पिछले पांच सालों में कितनी पिक्चर बनीं भारत के इतिहास पर?माहौल अलग थे लेकिन हर कहानी का सार एक ही था. हमेशा एक ही खून गन्दा रहा है और एक साफ़ पवित्र पावन. ये सब कहानियां अभी ही क्यों? जवाब शायद आप समझ गए होंगे. और हाँ, यदि कल अमरीका में कोई रैली निकले किसी भी कारणवश, तो आप अपने अभिनेताओं के ध्यान को कुछ क्षण के लिए भंग होता जरूर पाएंगे.

3 Comments

  1. Well said..ek ek shabd Mai sachai….ye wakai ostrich hai but I hope ye sterile ho har n ab ande na de n eggs import Kare jae from Hollywood..like Meryl Streep

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